Anxiety or Anxiety Disorder: जानिये एंग्जायटी, एंग्जायटी डिसऑर्डर क्या है, इसके लक्षण, कारण, प्रकार और इलाज

Anxiety or Anxiety Disorder Meaning in Hindi

Anxiety (एंग्जायटी) का शाब्दिक अर्थ होता है चिंता या घबराहट। इंसानों के लिए किसी भी बात की चिंता करना आम बात है, तो ये एंग्जायटी बीमारी (Anxiety Disorder) क्या है? चिंता और एंग्जायटी में क्या फर्क है? अगर आपके मन में भी यही सवाल है तो आज का ये लेख ख़ास आपके लिए है। इसमें मैंने आपको एंग्जायटी क्या है, एंग्जायटी डिसऑर्डर क्या है, इसके कारण, लक्षण, प्रकार और इलाज के बारे में सम्पूर्ण जानकारी दी है। 

दोस्तों, परीक्षा या पब्लिक स्पीकिंग जैसी तनावपूर्ण स्थितियों में एंग्जायटी का होना आम बात है। लेकिन जब ये चिंता अत्यधिक बढ़ जाती है, आपको डर और बहुत बेचैनी होने लगती है तो यह एक मेंटल प्रॉब्लम बन जाती है जिसे एंग्जायटी डिसऑर्डर के नाम से जाना जाता है। इसका आपकी हेल्थ और रोजमर्रा के कामकाज पर बुरा प्रभाव पड़ता है। 

लेकिन एंग्जायटी डिसऑर्डर को पहचान पाना आसान नहीं है। शुरुआत में ये सिर्फ एक मामूली सा स्ट्रेस लगता है पर धीरे-धीरे ये एक बड़ी प्रॉब्लम बन जाता है। आप असमर्थ महसूस करने लगते हैं और अधिक परेशान हो जाते हैं, जिससे Anxiety Attack का भी खतरा बढ़ जाता है। इसलिए एंग्जायटी के बारे में जानना, एंग्जायटी डिसऑर्डर की पहचान करना, इसका इलाज, आदि जानकारी होना आपके लिए बहुत ज़रूरी है।  

एंग्जायटी क्या है (What is Anxiety) 

एंग्जायटी चिंता, डर और घबराहट का भाव होता है। यह स्ट्रेस को लेकर आपके शरीर का एक सामान्य रिएक्शन होता है। एंग्जायटी में अक्सर बेचैनी, टेंशन होती है, कभी-कभी पसीना भी आता है या दिल की धड़कने भी बढ़ने लगती है। उदाहरण के लिए- टेस्ट या इंटरव्यू से पहले, कोई महत्वपूर्ण निर्णय लेने से पहले या काम में समस्या के कारण आपको एंग्जायटी का अनुभव होता है। 

कभी-कभी एंग्जायटी होना फायदेमंद भी होता है। क्योंकि यह हमें खतरे को पहचानने में मदद करता है और उसकी तरफ हमारा ध्यान केन्द्रित करता है ताकि हम सुरक्षित रह सकें।  

आमतौर पर एंग्जायटी चिंता खत्म होने के साथ ही खत्म हो जाती है, लेकिन एंग्जायटी डिसऑर्डर या एंग्जायटी बीमारी से पीड़ित इंसान के लिए ये डर और चिंता सिर्फ कुछ समय के लिए ही यानी Temporary नहीं होती है। 

एंग्जायटी डिसऑर्डर क्या है? (What is Anxiety Disorder) 

एंग्जायटी डिसऑर्डर एक मेंटल हेल्थ कंडीशन होती है जिसमें व्यक्ति को अत्यधिक चिंता, भय और बेचैनी का लगातार अनुभव होता है। दूसरे शब्दों में कहें तो, जब एंग्जायटी का स्तर इस हद तक बढ़ जाता है कि उससे आपकी रोज़मर्रा की ज़िन्दगी, काम करने की क्षमता और सेहत पर बुरा असर पड़ने लगता है, तब उसे एंग्जायटी डिसऑर्डर कहते हैं। Anxiety Disorder को हिंदी में ‘चिंता का विकार’, एंग्जायटी बीमारी या एंग्जायटी रोग के नाम से भी जाना जाता है।

इसमें आपकी एंग्जायटी समय के साथ बढ़ती रहती है। एंग्जायटी डिसऑर्डर के सामान्य लक्षण लोगों की परफॉरमेंस, काम और उनके रिश्तों में दिख जाते हैं। इसमें मन अशांत रहता है। व्यक्ति बहुत ज्यादा सोचता है, उसका मन हर समय नकारात्मक विचारों से घिरा रहता है। उसका अपनी प्रतिक्रियाओं पर कंट्रोल नहीं रहता है। व्यक्ति बस यही सोचता रहता है कि उसके साथ कुछ गलत होने वाला है। एक रिसर्च के अनुसार, एंग्जायटी डिसऑर्डर पुरुषों की तुलना में महिलाओं को ज्यादा होते हैं। 

एंग्जायटी डिसऑर्डर की पहचान कैसे करें?

एंग्जायटी डिसऑर्डर तब होता है जब-

  • एंग्जायटी आपके काम करने की क्षमता पर प्रभाव डालने लगती है, 
  • आप हर बात पर ओवर रियेक्ट करने लगते हैं, 
  • आप अपनी प्रतिक्रिया (Response) को कंट्रोल नहीं कर पाते हैं। 

Anxiety Disorder Symptoms 

एंग्जायटी डिसऑर्डर के सामान्य लक्षण कुछ इस प्रकार हैं-

  • दिल की धड़कने एक दम से बढ़ जाना या सांस फूलना
  • पैनिक, डर या बेचैनी लगातार महसूस होना   
  • घबराहट 
  • हाथ और पैर ठंडा पड़ जाना या सुन्न हो जाना
  • मांसपेशियों में तनाव 
  • सांस लेने में दिक्कत
  • थकान
  • बुरे सपने 
  • लगातार नकारात्मक विचार 
  • फोकस न कर पाना 
  • नींद न आना
  • पसीना आना 
  • मुंह सुखा रहना 

अगर आपको एंग्जायटी डिसऑर्डर के लक्षण (Signs of Anxiety Disorder) महसूस होते हैं तो आपको तुरंत अपने डॉक्टर से इस बारे में सलाह लेनी चाहिए। वो आपको इस प्रॉब्लम से निकलने में आपकी मदद करेंगे। एंग्जायटी डिसऑर्डर को पहचानने के लिए कोई लैब टेस्ट उपलब्ध नहीं है।

एंग्जायटी डिसऑर्डर के कारण (Causes of Anxiety Disorder)

जेनेटिक और वतावार्णीय तत्वों के कारण आप एंग्जायटी डिसऑर्डर का शिकार हो सकते हैं। अगर आप इन परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं तो भी आपको एंग्जायटी डिसऑर्डर हो सकता है-

  • सदमा (Trauma): अगर आपने अपने बचपन या जीवन में कभी भी कुछ तनावपूर्ण या दर्दनाक परिस्थितियों का सामना किया है, तो आपके एंग्जायटी डिसऑर्डर होने की संभावना अधिक होती है। 
  • तनाव (Stress): अगर आपके मन में किसी बात को लेकर अत्यधिक चिंता या तनाव है जो वक़्त के साथ कम होने के बजाये बढ़ता ही जा रहा है, तो ऐसे में एंग्जायटी डिसऑर्डर हो सकता है। जैसे- काम की चिंता, पैसों की चिंता या किसी परिजन की मृत्यु के कारण, आदि।     
  • हेल्थ कंडीशन: कुछ लोगों में एंग्जायटी किसी हेल्थ इशू के कारण भी हो सकती है। जैसे- थाइरोइड, डायबिटीज, हार्ट प्रॉब्लम, अस्थमा, रेस्पिरेटरी प्रॉब्लम, आदि। 
  • व्यक्तित्व के कारण (Personality Traits): कुछ पर्सनालिटी ट्रेट्स के कारण, जैसे अगर आप शर्मीले हैं या आपको अनजान लोगों के साथ मिलने में असहज महसूस होता है, आप उनसे बचने की कोशिश करते हैं तो आपके एंग्जायटी डिसऑर्डर होने के चांस ज्यादा हैं।
  • नशे का सेवन: ड्रग्स या शराब के सेवन से शरीर में सेरोटोनिन और अन्य न्यूरोट्रांसमीटर के लेवल में बदलाव आते हैं जिससे एंग्जायटी बिगड़ जाती है और आप ज्यादा चिंता करने लगते हैं। इससे एंग्जायटी डिसऑर्डर हो सकता है।  
  • पारिवारिक इतिहास: आपके परिवार में अगर किसी को एंग्जायटी या दूसरी मेंटल हेल्थ कंडीशन हो या रह चुका हो, तब भी आपके एंग्जायटी डिसऑर्डर होने के चांस हैं।          

एंग्जायटी डिसऑर्डर के प्रकार (Types of Anxiety Disorders)

एंग्जायटी डिसऑर्डर कई प्रकार के होते हैं- 

  • Generalised Anxiety Disorder (GAD) 

जनरलाइज्ड एंग्जाइटी डिसऑर्डर (GAD) में व्यक्ति छोटी-छोटी बातों पर बहुत सोचते हैं (Overthinking) और अत्यधिक चिंता (Excessive Worry) करने लगते हैं। जैसे- स्वास्थ्य, पैसा, काम, परिवार आदि की बहुत ज्यादा चिंता करते हैं। ऐसा अगर लगातार 6 महीने तक होता है और बढ़ता जाता है तो आप GAD Disorder के शिकार हो सकते हैं।  

  • Panic Disorder 

पैनिक डिसऑर्डर की अवस्था में इंसान को अचानक और लगातार Panic Attack आते हैं, जो कुछ मिनटों के होते हैं। जब कोई खतरा न होने के बावजूद भी मन में किसी बात को लेकर बहुत ज्यादा डर होता है, तब पैनिक अटैक आते हैं। पैनिक अटैक हार्ट अटैक के सामान ही लगते हैं, इसलिए इन्हें पहचान पाना थोड़ा कठिन होता है। ऐसी स्थिति में आपको डॉक्टर से सलाह आवश्य लेनी चाहिए।   

  • Phobia 

फोबिया एक अत्यधिक डर वाली स्थिति होती है जिसमें इंसान को कुछ विशेष प्रकार की चीज़ या स्थिति से बहुत ज्यादा डर लगता है। ये डर मकड़ी, चूहे, ऊंचाई, लिफ्ट में फंसने या प्लेन में सफ़र करने आदि जैसी सामान्य चीज़ों या स्थितियों से हो सकता है।

  • Separation Anxiety Disorder

ये स्थिति अकसर बच्चों और किशोरों में पायी जाती है। इसमें उन्हें अपने माता-पिता या जिससे उन्हें बहुत लगाव होता है, उनसे बिछड़ने का डर होता है। उन्हें लगता है जैसे उनके माता-पिता को कुछ हो जायेगा या फिर वो वापस नहीं आयेंगे।

  • Social Anxiety Disorder 

सोशल एंग्जायटी डिसऑर्डर में व्यक्ति को लोगों द्वारा आलोचना (Judge or Criticize) किये जाने का डर होता है। इसलिए यह नए लोगों से मिलना या घर से बाहर जाना पसंद नहीं करते हैं। इन्हें लगता है कि सबकी नज़रें इन पर हैं। 

एंग्जायटी डिसऑर्डर का इलाज (Anxiety Disorder Treatments)

एंग्जायटी डिसऑर्डर का इलाज काउंसलर, साइकोलोजिस्ट और दवाइयों की सहायता से किया जाता है। हालांकि एंग्जायटी को कंट्रोल करने के लिए आप इन स्टेप्स को फॉलो कर सकते हैं। 

Ways To Reduce Anxiety
  • कैफीन का सेवन कम करें: कॉफ़ी में कैफीन अधिक मात्रा में होता है, जिससे एंग्जायटी बढ़ती है। इसके बजाये आप हर्बल टी पी सकते हैं।  इसमें एंटी-ऑक्सीडेंट्स अधिक मात्रा में होता है। 
  • स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं: रोज़ व्यायाम करें, पोष्टिक आहार का सेवन करें, बैलेंस डाइट और पर्याप्त नींद अवश्य लें। 
  • स्वस्थ आहार खाएं: पालक, गाजर, जायफल, हल्दी आदि को अपने खाने में शामिल करें, यह एंग्जायटी से राहत दिलाने में सहायक होते हैं। इनमें एंटी स्ट्रेस और एंटी डिप्रेसिव गुण होते हैं।  
  • अपने विचार साझा करें: अपनी चिंताओं और विचारों को अपनों के साथ साझा करें, इससे आपको अपनी मुसीबत का हल निकालने में और चिंता से बाहर आने में सहायता मिलेगी। आपको महसूस होगा कि आप अकेले नहीं है। 
  • मैडिटेशन करें: मैडिटेशन या ध्यान लगाने की कोशिश करें। प्राणायाम जैसी Breathing Exercises करने से आपको सहायता मिलेगी। इससे आपको एंग्जायटी, चिंता, नींद न आने या फोकस न कर पाने जैसी समस्याओं से भी राहत मिलेगी।     
  • शराब पीने से बचें: शराब पीने से चिंताओं से कुछ समय के लिए राहत ज़रूर मिलती है लेकिन उसके बाद एंग्जायटी और बिगड़ने लगती है। क्योंकि अल्कोहल हमारे शरीर में सेरोटोनिन और अन्य न्यूरोट्रांसमीटर के लेवल को बदल देता है जिससे एंग्जायटी बढ़ती है। 
  • अपनी चिंताओं को लिखें: अपनी चिंताओं को लिखने से आपको हल्का महसूस होगा जिससे आप अच्छा महसूस करने लगेंगे। 
  • खुशबू का प्रयोग करें: अच्छी चीज़े सूंघने से मूड अच्छा होता है और रिलैक्स फील होता है। इसके लिए लैवेंडर आयल या जायफल का तेल सबसे अच्छा माना जाता है। इसके साथ ही आप बादाम, मिशेलिया, अल्बा लीफ आदि का तेल भी अपने सिर में लगा सकते हैं। इससे आपको घबराहट, बेचैनी से रहत मिलेगी।  
  • खुद से सकारात्मक बातें करें: इससे आपका कॉन्फिडेंस लेवल बढ़ेगा, आपको अच्छा महसूस होगा और आपके मूड में अच्छा बदलाव आएगा।
  • पानी पर्याप्त मात्रा में पियें: डिहाइड्रेशन के कारण भी एंग्जायटी की समस्या बढ़ सकती है। इससे आपके दिल की धडकनों पर असर पड़ता है जिससे आप पैनिक या एंग्जायटी अटैक के लक्षण महसूस कर सकते हैं।    

एंग्जायटी अटैक कैसा होता है? (मेरा अनुभव)

एंग्जायटी अटैक का अनुभव कैसा होता है या एंग्जायटी अटैक आने पर कैसा महसूस होता है ये समझाने के लिए मैं आपके साथ अपना पहला एंग्जायटी अटैक का अनुभव शेयर कर रही हूँ। लेकिन इससे पहले मैं आपको अपने व्यक्तिव के बारे में बता रही हूँ ताकि आप इसे बेहतर तरीके से समझ पायें।

मेरा व्यक्तित्व शर्मीला किस्म का है, बचपन से ही मुझे छोटी-छोटी बातों पर टेंशन लेने की आदत थी। उस समय हर स्टूडेंट के लिए होमवर्क न कर पाने की टेंशन, टेस्ट या पेपर में क्या आएगा, जो पढ़ा अगर वो नहीं आया तो क्या होगा, आदि टेंशन शायद सबको होती थी। इसलिए कभी ध्यान ही नहीं गया की टेंशन से इतना बड़ा मसला भी खड़ा हो सकता है। 

मुझे याद है जब मुझे पहली बार एंग्जायटी अटैक आया था तब सर्दी का मौसम था, मुझे घुटन और घबराहट सी महसूस हो रही थी। इसलिए बाहर बालकनी में टहलने निकली थी। लेकिन थकान ज्यादा होने पर मैं कुछ ही मिनटों में कमरे में वापस लौट आई थी। और फिर जब घबराकर अपने कमरे में रोने लगी तभी साँस लेने में तकलीफ शुरू हुई। सांस लेना इतना मुश्किल हो गया था कि मैं किसी को आवाज़ भी नहीं लगा पा रही थी। 

भाग्य से बहन तब कमरे में अपना कुछ सामान लेने आई थी और जब उसने मेरी हालत देखी तो मम्मी को बुलाया। उस टाइम मेरे हाथ, होंठ और पैर कांप रहे थे पर मुझे बहुत गर्मी लग रही थी। मम्मी ने ब्लड प्रेशर (BP) और बुखार चेक किया, नार्मल था। फिर मम्मी ने मुझे चीनी खाने को दी और कहा इससे ठीक हो जायेगा। फिर वैसा ही हुआ कुछ मिनटों में मुझे नार्मल महसूस होने लगा। 

मम्मी ने कहा ये एंग्जायटी अटैक था। अब उस टाइम मैं अनजान थी कि एंग्जायटी क्या होता है। क्योंकि मेरे लिए ये एक ‘Near To Death Experience’ जैसा था इसलिए इसके बाद से मैं बहुत घबरा गयी थी। इसके बाद मुझे कुछ महीनों के अंतराल पर तकरीबन 3-4 बार एंग्जायटी अटैक आये थे। 

लेकिन एंग्जायटी के बारे में जानकारी इकठ्ठा करने के बाद अब मुझे अपनी एंग्जायटी को कंट्रोल करना आ गया है। इसमें मेरे लिए सबसे ज्यादा मददगार प्राणायाम, मैडिटेशन और व्यायाम रहा है। उम्मीद करती हूँ आपके लिए भी इस लेख में बताये गये एंग्जायटी को कंट्रोल करने के तरीके फायदेमंद साबित होंगे।

Conclusion  

दोस्तों आज जब दुनिया ने मेंटल हेल्थ के बारे में खुलकर बात करना शुरू किया है तो ऐसे में उसके हर पहलु को समझने की कोशिश हमें ज़रूर करनी चाहिए। भारत में साल दर साल मानसिक स्वास्थ्य से समबन्धित मामलों में बढौतरी हो रही है। इसलिए इसके बारे में जानना आवश्यक है। ये लेख मेरा एक छोटा सा प्रयास है आपको एंग्जायटी बीमारी से अवगत करवाने और एंग्जायटी का इलाज (Anxiety Treatment) कैसे करें ये बताना का। उम्मीद करती हूँ ये लेख आपके लिए उपयोगी साबित हुआ होगा।                      

FAQs 

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