कोरोना काल में हिम्मत करें बुलंद! जानिये कैसे एक रिक्शेवाले ने ऑक्सीजन कैन से की सहायता|

कोरोना काल में हिम्मत करें बुलंद!

कोरोना काल हम सबके लिए मुश्किलों भरा है. दुनियाभर के लगभग हर परिवार ने कोरोना का कहर झेला है. इसका प्रभाव मेरे परिवार ने भी 2 बार झेला है. मैं जानती हूँ ऐसे समय में हिम्मत बनाये रखना और खुश रहना कितना ज़रूरी होता है, इसे बनाये रखना कितना ज्यादा मुश्किल होता है. इसलिए मैं आप सबके लिए कुछ ऐसे किस्से- कहानियां शेयर करना चाहती हूँ जिनके बारे में जानकार कोरोना काल में आपकी हिम्मत होगी बुलंद और कोरोना से जीतने में आपको मिलेगी मदद.

आपसे निवेदन है की अगर आपके पास भी हैं कुछ ऐसे किस्से जिनसे लोगों को कोरोना से जीतने में मदद मिल सके तो उन्हें हम सबके साथ साझा करने के लिए मुझसे संपर्क करें.

2021 में जिन राज्यों में कोरोना के सबसे बदतर हालात थे उसमें से एक राज्य दिल्ली है, जिसकी मैं निवासी हूँ. दादी, डैडी, मैं, मेरी छोटी बहन हम सब संक्रमित थे. उस वक़्त ऐसे हालत बन गए थे की घर के बड़ों की तबियत बहुत ज्यादा बिगड़ गई थी. खाने से ज्यादा ऑक्सीजन मीटर पर ऑक्सीजन लेवल किसका कितना है इसकी चिंता रहती थी. एक वक़्त ऐसा भी आया जब किस को भरती कराएँ, किसको बचाएं, कैसे बचाए, क्या करें ये उलझन बन गई थी. 

शुक्र है भगवन का की मम्मी और दादी की देखभाल करने वाली हमारी आरती आंटी सुरक्षित थी. मम्मी को पिछले साल कोरोना हुआ था. उन्हीं की वजह से हमें कोरोना के लक्षण पहचानने और टेस्ट करवाने में देर न लगी. उन्हीं के अथक कोशिशों से, हिम्मत से हम सब आज स्वस्थ हैं. मम्मी ने अकेले पूरे परिवार का ख्याल रखा था.

उस समय ये हालात थे की अस्पतालों में प्रवेश के लिए मरीजों की लम्बी कतारें थी मगर इलाज के लिए न बेड थे और न ऑक्सीजन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध. घर के सबसे मज़बूत लोगों को तब लाचार देखा था. हर जगह बस बढ़ते कोरोना मामलों का ज़िक्र और बढ़तीं मौतों का आकड़ा था. ख़बरों को देख कर इतनी नकारात्मकता फ़ैल चुकी थी की उम्मीदें डगमगाने लगी थी.

कठिन समय में हमारे अपनों और कुछ अनजान लोगों ने हमारा साथ दिया, जिन्हें कभी भूल नहीं सकते. कुछ ऐसे रिश्ते भी थे जिन्होंने सुध लेने की ज़रूरत नहीं समझी मगर हालत के चलते समझा जा सकता था.

मेरा ये ब्लॉग उन लोगों को समर्पित है जो जान- पहचान, रिश्ते- नाते की फ़िक्र किये बिना बस मानवता के नाते लोगों की मदद करते हैं. उन लोगों को समर्पित है जिन्होंने हमारे मुश्किल समय में अनजान होते हुए भी हमें हिम्मत बंधाई. उम्मीद है आपको भी उनके बारे में जानकर हिम्मत, मदद और प्रेरणा मिलेगी.

बात तब की है जब डैडी का ऑक्सीजन लेवल 2 दिन से लगातार घट रहा था. अस्पतालों के बहार लम्बी कतारें थी, कई परिवार इलाज, अस्पताल में बेड और ऑक्सीजन के लिए संघर्ष कर रहे थे. कुछ मरीजों ने तो इलाज के लिए लगी कतारों में ही दम तोड़ दिया था. ये सब देख, औं कर ये निर्णय लिया गया की जब तक अस्पताल में कोई बेड नहीं मिलता तब तक डैडी का इलाज घर पर फैमिली डॉक्टर की देख- रेख में किया जायेगा.

ऑक्सीजन सिलेंडर न मिल पाने पर फैमिली डॉक्टर ने डैडी के लिए ऑक्सीजन कैन इस्तेमाल करने का सुझाव दिया. हम सबने अपने- अपने तरीकें से ऑक्सीजन कैन की तलाश की. ऑनलाइन जितने लोगों से, जहाँ- जहाँ से हो सकता था वहां- वहां मदद की अपील की. सोशल मीडिया से भी कई दोस्तों ने नंबर शेयर किए पर कुछ फायदा नहीं हो रहा था. तकरीबन 98% नंबर ऐसे थे जो उन सर्विसेज से मेल ही नहीं खाते थे, बहुत से नंबर ऐसे थे जो बंद बता रहे थे और कुछ ऐसे जो धांधली कर रहे थे.

उस दौरान एक अजनबी रिक्शेवाले अंकल ने मम्मी की मदद की थी.

मम्मी अकेले ऑक्सीजन कैन/ सिलिंडर का पता करने निकली थीं. लॉकडाउन के कारण कोई मदद के लिए आगे नहीं आ पा रहा था, जो आता वो कोविड पेशेंट या ऑक्सीजन सुनके मना कर देता. बहुत मुश्किल से एक रिक्शावाला मम्मी को मिला. मम्मी ऑनलाइन जितनी जगहों पर ऑक्सीजन सिलेंडर/ कैन के बारे में जानकारी थी वहां गईं, कई जगह लोगों से पूछ- पूछ कर वही रिक्शावाला उन्हें बिना किसी तकलीफ के लेकर गया लेकिन जो चाहिए था वो नहीं मिल रहा था. तब रिक्शेवाले अंकल खुद ढूंढते- ढूंढते उन्हें एक दूकान पर लेकर गए जहाँ से ऑक्सीजन कैन मिल पायी.

ऑक्सीजन कैन मिलने की खबर से राहत की सांस ली थी.

कठिन समय में उन रिक्शेवाले अंकल का मिलना और फिर ऑक्सीजन कैन का मिलना हमारे लिए किसी चमत्कार से कम नहीं था. सब जानते हुए भी उन्होंने हमारी मदद की थी इसलिए वो हमारे लिए भगवान समान थे. मम्मी ने जब उन्हें पैसे देने चाहे तो उन्होंने बताया की पिछले साल कोरोना की वजह से उनकी जॉब चली गयी थी. जिसके बाद उनके परिवार को मुसीबतों का सामना करना पड़ा था. उस समय एक अजनबी उनका सहारा बने थे और आज वो भी लोगों की इस ज़रूरत को समझते हुए उनकी मदद कर रहे हैं.

हिम्मत और कोशिश से कोरोना को हराना है मुमकिन
हिम्मत और कोशिश से कोरोना को हराना है मुमकिन

दोस्तों कोरोना का कहर झेल चुके एक परिवार की ओर से आप सबको ये कहना चाहती हूँ की कोरोना का प्रभाव सिर्फ शारीरिक तौर पर ही नहीं बल्कि मानसिक तौर पर भी पड़ता है. इंसान इतने दिन कमरे में बंद रह कर शारीरिक और मानसिक रूप से कमज़ोर महसूस करने लगता है. इसलिए अपनों से बात- चीत करते रहें.

कोरोना के समय में खुद को और परिवार को खुश और स्वस्थ रखने के लिए सबसे ज़रूरी है की

  • आप उम्मीद बनाए रखें. सबके धीरे- धीरे हिम्मत छोड़ देने पर भी हमारी मम्मी ने हिम्मत दिखाई थी और आज उन्हीं की वजह से डैडी हमारे साथ है.
  • शुरुआत से ही सावधानी बरते. आपकी सेहत और ज़िन्दगी का असर आपके साथ- साथ आपके अपनों पर भी पड़ता है.
  • जितना हो सके खुश रहने की कोशिश करे. घर का माहोल हल्का हो तो बिमारी का एहसास कम होता है.
  • ख़बरों से जितना हो सकें दूरी बनाये. मैं जानती हूँ कुछ लोग इस बात से असहमत होंगे. जब हम कोरोना का कहर झेल रहे थे तो आये दिन बढ़ते कोरोना मामले, अस्पतालों में ऑक्सीजन और बेड की कमी, कोरोना से बढती मौतों का आंकड़ा हमें डराता था. इसके कारण हमारी हिम्मत साथ छोड़ रही थी. ऐसा लगने लगा था की हम कुछ नहीं कर सकते.
  • कोशिश करते रहिये, हार कभी मत मानिये. लेकिन इस बात को भी समझिये की सब कुछ आपके हाथ में नहीं होता. जब आपकी लाख कोशिशों के बाद भी आपके मन का न हो रहा हो तो समझ लीजिये की इसमें ही भगवन की मर्ज़ी है.
  • अपनी गलतियों से सबक लीजिये और आगे बढिए, पछतावा करने का कोई फायदा नहीं है. जैसे आपको आज मदद की ज़रूरत है वैसे ही कल किसी और को होगी ये सोच कर लोगों की मदद कीजिये. ये समय रूठने का नहीं है, अपनों को बचाने का है.
  • कोरोना से बचाव के लिए सरकार बार- बार कह रही है मास्क लगाने, हाथ धोने, सोशल डिस्टन्सिंग का पालन करने को. मैं जानती हूँ ये हर समय करना आसान नहीं है पर अपने आलस के चक्कर में अपनों की जान खतरे में डालना भी सही नहीं है. इसलिए सरकार के दिशा- निर्देशों का पालन करें.
  • कोरोना जब आया था तब भी यही कहा और माना गया था की कोरोना वायरस से सबसे बड़ा बचाव सावधानी है. इससे बचाव के लिए सबको अपना इम्युनिटी यानी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढाने की ज़रूरत है.

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4 thoughts on “कोरोना काल में हिम्मत करें बुलंद! जानिये कैसे एक रिक्शेवाले ने ऑक्सीजन कैन से की सहायता|”

      1. Thank you Riya
        For sharing ur experience bahut se logo ne saath nahi diya but kuch aise logo ne saath diya jo hamesha yaad rahenge.

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