गुस्सा कंट्रोल कैसे करें? जाने गुस्सा कम करने के आसान तरीके!

गुस्सा कंट्रोल कैसे करे?

गुस्सा कंट्रोल करना कभी- कभी बहुत मुश्किल हो जाता है. कुछ बातें ही ऐसी होती है जिन्हें सुनते या सोचते ही गुस्सा अपने आप बढ़ जाता है और कब आपे से बाहर हो जाता है इसकी भनक आपको तब लगती है जब कोई करीबी कहता है की तुम्हे गुस्सा कंट्रोल करने की ज़रूरत है. कुछ मामलों में तो ऐसा भी होता है की करीबी ही आपको दिमागी डॉक्टर को दिखाने की सलाह दे देते हैं. मैंने इन दोनों मामलो का सामना किया है और विश्वास रखिये की गुस्सा कंट्रोल करना कोई मुश्किल काम नहीं है अगर आपके पास नीचे दिए गए सवाल का जवाब हाँ या न में उपलब्ध है.

किसी की गलती पर उसे सुनाने से पहले कभी क्या खुद को उसकी परिस्तिथि में रख कर, उसकी मजबूरी समझने की कोशिश आपने की है?

ज्यादातर लोग सिर्फ खुद का सोचते हैं और सामने वाले इंसान को दोष देने से पहले या उस पर गुस्सा निकालने से पहले उसके बारे में ज़रा भी नहीं सोचते. अगर कुछ सही है तो है अगर कुछ गलत है तो है. अपनी गलती से पहले हमें सामने वाले की कमियां दिख जाती हैं.

सोशल मीडिया पर आये दिन ऐसे पोस्ट्स देखने मिलते हैं-‘लोग क्या कहते हैं इससे आपको फरक नहीं पढना चाहिए. लोग क्या कहेंगे, क्या सोचेंगे इससे आपका क्या लेना देना, अब लोग क्या सोचेंगे ये भी अगर आप ही सोचेंगे तो फिर लोग क्या सोचेंगे, लोग क्या करेंगे?”

गुस्सा कंट्रोल कैसे करे?

लेकिन एक बात बताओ हम सबको खुश रहना पसंद है तो क्या दूसरों को दुख देकर हम खुद खुश रह पायेंगे?

अब इसमें काफी लोगों को ये लगेगा की मैं दूसरों की बात क्यों कर रही हूँ तो फिर चलो बात अपनों की करते हैं. क्या हमें अपनों पर गुस्सा नहीं आता या फिर क्या अपने हम पर गुस्सा नहीं करते? जवाब हाँ होगा ये सोच कर सीधा मुद्दे पर आती हूँ.

आज की सुबह मेरी कुछ डांटती- फटकारती आवाजों से हुई. आवाज़ डैडी की थी, वो आंटी(दादी की सेवा और देखभाल करती हैं) पर गुस्सा कर रहे थे क्योंकि वो पिछले कुछ दिन से देर से काम पर आ रही थी और समय से पहले अपने घर के लिए बिना किसी को बताये निकल जा रही थी.

आंटी के जल्दी जाने का मतलब था दादी का 14 घंटे बिना कुछ खाए रहना जो की दादी की कमजोरी और बढ़ते दर्द का कारण बन सकता था, ये चिंताजनक था इसलिए डैडी ने आज उन्हें देर से आने पर टोका.

बजाये अपनी गलती मानने के आंटी डैडी पर उल्टा चिल्ला पड़ी और बारिश को बार- बार सुबह देर से आने और समय से पहले जाने का कारण बताने लगी.

इस पर डैडी ने जोर से बोला की ठीक है बारिश की वजह से दो दिनों से देर हुई मैं मानता हूँ लेकिन आज तो बारिश भी नहीं हो रही थी फिर आज कैसे देर हुई?

आंटी ने अपनी आवाज़ बढ़ा कर बोला- “भैया मैं हाथ जोड़ता हूँ मुझसे मत बोलो मैं जा रहा हूँ. धुप हो, बारिश हो, आंधी हो, तूफ़ान हो, धुंध हो मैं तब भी आता हूँ, मुझे पैसो का नहीं है भैया मैं काम के लिए आता हूँ’. (आंटी ये सब बार- बार बोलती रही.)

मम्मी और मैं इस बीच डैडी और आंटी को शांत करवाने में लगे उए थे की इतने में आंटी की तरफ से दूसरा तर्क तेज़ आवाज़ में आया- ‘भैया क्या करू जल्दी नहीं जाऊं तो? हम को गाडी नहीं मिलता है.’

इस पर डैडी बोले की गाडी के आने-जाने के पैसे ले लिया करो. तब भी आंटी अपना वही हाथ जोड़ता हूँ अब से सुबह 6 बजे आ कर यहाँ बैठ जाऊंगा और रात को 10 बजे जाऊंगा.

इतने में नानी भी दौड़ती- दौड़ती आई. नानी को आता देख आंटी रोने लगी और ज़ोर से चिल्लाने लगी, बोली भैय्या मेरा इतना तबियत ख़राब था फिर भी मैं आ रही थी सारे काम कर रही थी बिना किसी शिकायत के उस पर भी आप ऐसे बात नहीं कर सकते. मैं नहीं आऊंगा कल से अब देखना क्या होता है जब मना करूँगा काम से तब पता चलेगा.

डैडी बोले की तुमने मुझे बताया था की तुम्हारी तबियत खराब है?

आंटी कहती मैंने नानी को बताया था. नानी ने भी कहा के हाँ मुझे पता था. डैडी बोले, ये तो मुझे किसी ने बताया नहीं. इस पर नानी ने कहा की इसने बताया था तबियत ठीक नहीं है, थक जाती है. लेकिन इसको मैंने तभी बोला था की भैय्या को बता देना नहीं तो वो गुस्सा करेंगे. ये सुन कर आंटी कहती की अब क्या छोटी-छोटी बात भैय्या को बताऊँ?

डैडी ने बोला भी की ये कोई छोटी बात है क्या? लेकिन आंटी अपना वही राग अलापती रही, किसी की नहीं सुन रही थी वो.

तभी मैंने आंटी को एक कमरे में भेज कर गेट लगाया और मम्मी डैडी को दुसरे कमरे में ले गयीं. डैडी तो आंटी की ख़राब तबियत जानकर पछता रहे थे लेकिन आंटी लगातार बड़- बडाये जा रही थी. 

थोड़ी देर बाद जब माहोल शांत हुआ तब डैडी माफ़ी मांगने गये लेकिन आंटी वही अपने हाथ जोड़ता हूँ भैय्या वाली बात पर अड़ी रही. डैडी ने भी बोलना छोड़ दिया और पूजा कर के काम पर चले गये. आंटी की बड़- बड़ इसके बाद ढाई घंटे तक जारी रही. आंटी डैडी के बारे में बहुत बड़- बड़ कर रही थी इसलिए दो- तीन बार तो मेरा भी आंटी को बहुत सुनाने का मन किया.

आखिर मैं अपने डैडी के बारे में उनसे इतना कैसे सुन सकती हूँ? जहाँ ये सवाल मुझे परेशान कर रहा था वही मैं आंटी की ओर से भी सोच रही थी और उनकी परेशानी समझ सकती थी. आते ही अगर मेरे बॉस मेरी खराब तबियत के दौरान मुझ पर चिल्लाने लगते जबकि मैं रोज़ बिना किसी शिकायत काम कर रही होती तो मुझे भी अपने बॉस की ये बात चुभती और शायद मैं भी उनका यूं एक दम से ऐसा करना सहन न कर पाती और अपने बॉस पर चिल्ला देती.

साथ ही, मैं समझ पा रही थी की डैडी को भी पैसों से ज्यादा दादी की सेहत की चिंता थी. आंटी के देर से आने और जल्दी जाने का सीधा असर दादी की तबियत पर होता है इस बात से भी मैं अच्छी तरह से वाकिफ थी.

जहाँ मैं आंटी की बारिश वाली मजबूरी को समझ रही थी वही मैं उनके जल्दी चले जाने वाली बात से डैडी जितना ही निराश थी क्योंकि कुछ 15 -20 दिन पहले जब मौसम सही था, तब भी आंटी जल्दी बिना किसी को बताये जाने लगी थी.

तब मैंने खुद ही आंटी को पूरी बात समझाने की कोशिश की थी, ये महसूस भी किया था की आंटी को सुनने से ज्यादा सुनाने का शौक है. उनसे अगर उनके काम से ताल्लुक रखती हुई कोई भी बात की जाए तो वो तुरंत डिफेंस मोड में चली जाती हैं और अपने काम की तारीफें करती हैं जिससे सामने वाला उनकी कमी निकालने से पहले 100 बार सोचे.

मेरे समझाने पर आंटी 3-4 दिन तो समय से गयी लेकिन उसके बाद फिर से वैसा ही हो गया.

नतीजा डैडी का गुस्सा और आंटी का लड़ाई करना.

चूँकि ऐसी ही कई घटनाएँ मेरे खुद के साथ और सामने हो चुकी थी इस बार मैंने शांत रह कर दोनों के पहलुओं को जानना और समझना जरूरी समझा. इंसान गुस्से में काफी कुछ बोल देता है जिसका पछतावा उसे बाद में होता है. इस बात का ज़िक्र मैंने अपने पिछले ब्लॉग- गलती की माफ़ी कैसे माँगे? सॉरी कैसे बोले? में भी किया था. अगर आपने अब तक उसे नहीं पढ़ा है तो समय निकाल कर उसे भी पढ़े, उससे आपको जीवन में काफी मदद मिल सकती है.

गुस्सा कंट्रोल कैसे करे?

ऐसी ही कुछ मिलती-जुलती घटनाओं को ध्यान में रख कर मैंने ये कुछ बातें सीखी, आशा है के आप जैसे अच्छे पाठक इसे पढने के साथ- साथ इसे समझेंगे भी और जीवन में इन सीखों को अपना कर इनका लाभ भी उठा पाएंगे.

1. तलवार से ज्यादा गहरे ज़ख्म शब्द दे जाते हैं, इसलिए कुछ भी बोलने से पहले सोचें, फिर बोलें क्योंकि बोले गये शब्द कभी भी वापस असल ज़िन्दगी में नहीं लिए जा सकते.

2. आप क्या कैसे बोलते हो ये भी रिश्तों में बहुत मायेने रखता है. कुछ लोग इरादे बहुत अच्छे रखते हैं लेकिन उनके बात करने का तरीका उनके अच्छे इरादों पर पानी फेर देता है. इसका एहसास करने के लिए आप किसी को बिना मुस्कुराये थैंक यू बोल कर देखना और किसी को मुस्कुरा कर थैंक यू बोल कर देखना, फरक आपको साफ़ पता चल जायेगा. कमेंट कर के मुझे भी बताना की आपने ऐसा कर के कैसा महसूस किया.

3. सबका नजरिया एक जैसा नहीं होता लेकिन सामने वाले को समझने के लिए हम खुद को उसकी जगह पर रखने और उसकी परिस्तिथि समझने की कोशिश तो कर ही सकते हैं. मेरे ख्याल से किसी को भी समझने या समझाने का सबसे आसान तरीका यही है. इस तरह से हम जीवन में होने वाली काफी अनावश्यक लड़ाइयों से छुटकारा पा सकते हैं.

4. कोई भी इंसान अगर काम करता है, लगातार आपको मदद पहुंचाता है तो इसके पीछे उसकी कोई न कोई ज़रूरत या मजबूरी जरुर छुपी होती है. इसलिए किसी से भी गुस्से से पेश आने से पहले उसकी और अपनी ज़रूरतों/ मजबूरियों पर विचार करे. अगर गुस्सा या लड़ाई टाली जा सकती है तो उसी पर जोर दें.

5. किसी पर अगर गुस्सा आ रहा है या किसी की बात अच्छी नहीं लग रही है तो उससे बात करे और अपनी परेशानी बताएं, हो सकता है की सामने वाला किसी मजबूरी में हो. उसकी समस्या का हल निकाल कर आप अपनी समस्या से भी निजात पा सकते हैं.

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8 thoughts on “गुस्सा कंट्रोल कैसे करें? जाने गुस्सा कम करने के आसान तरीके!”

  1. 👌👌👌👌👌
    💥💥💥💥💥
    बहुत ही अच्छी तरह से समझाया हैं।
    💥💥💥💥💥
    👌👌👌👌👌

  2. Thank you नही बोलते है Thanks बोलते है।
    Thank you बोलते समय लगता है की सामनेवाले को order दे रहे है। Thanks मे kindness वाली feeling होती है। रही बात smile की तो मेरा smile देखकर खुद मेरी Mummy डर जाते है तो सोचो बाकी का क्या होगा।

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    Thanks for sharing!

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